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आयुर्वेद पर आधुनिक विचार ( Modern views on Ayurveda)

आयुर्वेद एक प्रकार की प्राचीन विद्या है, जिसमे हम आयु एवं स्वस्थ्य के बारे में अध्ययन करते है,  वास्तव में आयुर्वेद प्रकृति द्वारा प्राप्त औषधिओ यानि पौधों एवं प्राकृतिक पदार्थो का प्रथम स्थान है, जिसमे प्रकृति द्वारा प्राप्त पदार्थो के साथ सामान्य परिवर्तन करके तैयार किया जाता है, यह एक प्राकृतिक गूढ़ प्राप्त औषधि होती है, जिसमे प्रकृति के सारे गूढ़ विद्यमान होते है, जो हमारे सरीर (प्राकृतिक जीव) के बेवहार को सपोर्ट करता है। 
मानव एक प्रकृति द्वारा बनाया हुआ जीव है, जो प्राकृतिक पदार्थो को ही स्वीकार करता है, अर्थात स्वस्थ जीवन व्यतीत करने के लिये मानव को प्रकृति से जुड़े रहना होगा, प्राकृतिक पदार्थो का ही सेवन करना होगा, अर्थात आयुर्वेद एक प्राकृतिक वस्तुओं के गुणों का एवं सरीर पैर पड़ने वाले प्रभावों का सम्पूर्ण अध्ययन है, जिससे हम आजीवन स्वस्थ रहने एवं लम्बी आयु जीने के लिये प्रयोग कर सकते है।

हमारा विचार: 
अनुकूलन एक ऐसी  व्यवस्था जो मानव पर भी लागु होती है, जैसे अगर किसी को हिंदी आती है यानि हिंदी भाषा से अनुकूलित है तो, उसे अन्य कोई भाषा वाले प्रदेश में भेज दिया जाय तो, वो व्यक्ति वहा जाकर परेशान एवं दुखी हो सकता है, उसी प्रकार सरीर में भोजन एवं दवाइयाँ  प्राकृतिक हो तो ज्यादा साइड इफ़ेक्ट भी नहीं  करेगी। अतः आयुर्वेद चिकित्सा मानव के लिए सबसे उत्तम चिकित्सा है।

हमारा समाधान:
अगर हम अनुकूलित भोजन एवं अनुकूलित वातावरण में रहे तो, हमर सरीर में रोग कभी नहीं लगेगा।
अगर किसी कारन वस कोई रोग लग भी जाता है तो, आयुर्वेद से  ठीक किया जा  सकता है।
जबकि दुनिया की सारि चीजे पूर्ण नहीं होती है, उनमे कुछ न कुछ त्रुटि (दोष) जरूर होता है, उसी प्रकार हमारे सरीर में भी तीन प्रकार की त्रुटि(दोष) होते है,
  1. वात दोष 
  2. पित्त दोष 
  3. कफ दोष 
हमारा सरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है। 
  1. आकाश 
  2. अग्नि 
  3. वायु 
  4. जल 
  5. पृथ्वी 
इन्ही तत्वों की हमारे सरीर में कमी या अधिकता (असंतुलित) होने के कारण  हमारे सरीर में दोष उत्पन्न होते है, और, अनेको रोगो का कारण  बनते है। 

अतः सरीर में होने वाले तत्व असंतुलन को ठीक करके आजीवन निरोग रहा जा सकता है, इन्ही असंतुलन  एवं दोष को ठीक करने के लिये आयुर्वेद का प्रयोग किया जाता है।

आयुर्वेद एवं अंग्रेजी दवाइओं में अंतर:
चुकी अंग्रेजी दवाइया तुरंत फ़ायदा तो करती है, लकिन कुछ समय बाद इसका दुष्प्रभाव (Side Effect ) भी नजर आने लगता है, अंग्रेजी दवाइयाँ प्राकृतिक पदार्थो से ही बनाया जाता है, लेकिन प्राप्त पदार्थो के साथ बहुत ज्यादा छेड़-छाड़ करने के कारण उसके प्राकृतिक गुण में परिवर्तन हो जाता है, जो हमारे सरीर के बेवहार(अनुकूलता) से अलग हो जाती है। 

उदाहरण के तौर पर पानी (H2O)आपको पता होगा की क्या है और कितना फायदेमंद एवं जरुरी है, अगर इसके साथ अधिक छेड़-छाड़ किया जाय तो एक अलग गन गुण वाला पदार्थ (Hydrojan) प्राप्त होता है, जो, पानी के गुण के विपरीत होता है तथा हमारे सरीर के लिये नुकसानदायक भी होता है।

सारांश: 
  • स्वस्थ एवं लम्बी आयु जीने के लिये आयुर्वेदा सबसे बेहतर उपाय है। 
  • प्राकृतिक सरीर को स्वस्थ एवं निरोग रखने के लिये प्रकृति से जुड़े रहना बहुत जरुरी है। 
  • हमारा सरीर पांच तत्वों से मिलकर बना है, इन्ही तत्वों के असंतुलित होने पर दोष उत्पन्न होकर रोग पैदा करते है। 
  • प्राकृतिक अत्यधिक छेड़छाड़ करने से उसके प्राकृतिक गुण समाप्त हो  जाता  है, अप्राकृतिक सभी वस्तुए हमारे सरीर के लिये घातक सावित हो सकती है।  

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