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वास्तविक जीवन जीने का तरीका (The way to live real life!)


॥ वास्तविक जीवन जीने का तरीका ॥
(The way to live real life)
जीवन को 4 भागो में बाटा गया है...
    1) ब्रम्हचर्य (5 -25 वर्ष) एक ऐसा समय है, जो आदमी की बालावस्था मानी जाती है, इस समय ज्ञान अर्जन का कार्य करना चाहिए...!
    विद्यार्थी जीवन में पांच गुणों का होना अति आवश्यक है
    1. कौए की तरह चेष्टा 
    2. बगुले की तरह ध्यान 
    3. कुत्ते की तरह निद्रा 
    4. कम बोलने वाला कम भोजन करने वाला (अल्पाहार)
    5. घर की सभी चिंताओं से मुक्त रहना 
    (कक चेष्टा, बको ध्यानम, स्वान निद्रा, अथैवचः। अल्पाहारी ग्रिह त्यागी विद्यार्थी पांच लक्षणम॥)



    2) गृहस्थ  (25 - 50 वर्ष) वास्तव में मानव जीवन एक एक कठिन संघर्ष होता है, जिसमे हम इन नियमो का पालन करके अपने जीवन को सफल बना सकते है, अतः दूसरा जीवन काल गृहस्थ जीवन का है जिसका प्रयोग ब्रमचर्य का पालन करके किया जा सकता है लकिन वास्तविकता ये है इस जीवन में हमे अपना विकाश समृद्धि एवं धन अर्जन का कार्य करना चाहिए, जैसे ब्यापार , नौकरी परिवार का पालन पोषण धन अर्जन, भविष्यनिधि बचत इत्यादि का कार्य करना चाहिए, ये जीवन काल युवा अवस्था का काफी अच्छा सूंदर माना जाता है, रामायण का सुंदरकांड भी भगवान राम के गृहस्थ जीवन की कहानी है

    3) बानप्रस्थ  (50 - 75 वर्ष) बानप्रस्थ एक ऐसा समय इस समय मानव की उम्र ५० वर्ष के ऊपर होने लगती है, इस समय मानव को, पारिवारिक मोह माया एवं धन अर्जन का कार्य अपने पुत्र या किसी अपने को सौपना, पूजा पाठ, स्थल भ्रमण, दान पुण्य एवं पितृ मुक्ति का कार्य करना चाहिए।

    (अतः हमारा संस्थान जो गरीब बीमार लोगो की मदद करता है, और उन गरीबो की मदद करना एक अच्छी एवं पुण्य की बात है, अतः आपसे निवेदन है की अगर आप दान करना चाहते है, तो हमारे संस्थान को करे, आपके पैसे 100 % उपयोग दवा एवं चिकित्सा के रूप में किसी गरीब असहाय को दी जाएगी, आपके दिए पैसे से हम किसी बीमारी से दर्द झेल रहे लोगो को देंगे, (दर्द क्या है जाने) किसी के दर्द से मुक्ति दिलाना 1000 बार कुम्भ स्नान / गया ठाकुरद्वारा या हज करने से भी ज्यादा पुण्य प्राप्त होता है।

    "चुकी आपको पता नहीं होगा पुर्ण्य क्या है, सबको पुर्ण्य का मतलब उनके मृत्यु के समय पता चलती है" जबकि सबको पता है मृत्यु क्या है।"



    दान-पुर्ण्य जरूर करे 
    आपके दिए पैसे का उपयोग(खर्च) किसी वास्तविक गरीब असहाय बीमार के इलाज में किया जायेगा जिसका प्रमाण भी आपको दिए जायेगे, अतः दान जरूर करे..!!!
    किसी गरीब बीमार, असहाय की मदद करना सबसे बड़ा पुर्ण्य होता है


    4) सन्यास (74 - 100 वर्ष) सन्यास एक ऐसा समय होता है, ऐसे समय में मनुष्य को दुनिया के मोह माया से दूर होकर सरीर को स्वस्थ रखने का प्रयास किया जाता है, इस समय मनुष्य का सरीर पूरी तरह स कार्य नहीं करता है कारन है की मनुष्य के आयु 75 वर्ष से अधिक होने लगती है, मनुष्य के किसी प्रकार की चिंता फिक्र जिम्मेदारी लेना उनके स्वस्थ के लिया घातक साबित हो सकता है, अतः मनुष्य को ऐसी दसा में चिंता मुक्त जीवन जीने का प्रयास करना चाहिए, ऐसे समय जिस समय मनुष्य के सरीर मन एवं आत्मा के बिछड़ने का समय आ जाता है, ऐसे बिछड़ते समय मन एवं सरीर को अति कष्ट का सामना करना पड़ता है इसलिये सन्यास से मोह माया इत्यादि को छोड़ कर मुक्ति का रास्ता अपनाना एक बेहतर रास्ता होता है।



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