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नशा मुक्ति (Deaddiction)



नशा मुक्ति (Deaddiction)
मानव तीन चीजों से मिलकर बना है   आत्मा, मन एवं सरीर, जिसमे इन तीनो चीजों का होना अनिवार्य है अगर इनमे से कोई भी चीज अनुपस्थित हो तो बाकि का कोई अस्तित्व नहीं है, जैसे अगर आत्मा न हो तो सरीर एवं मन मृत घोसित हो जाता है, और अगर सरीर में कोई समस्या (बीमारी) हो तो आत्मा छोड़ के चली जाती है, और अगर मन में कोई खराबी हो तो मानव पागल हो जाता है ऐसी दसा में आगे चलकर शरीर एवं आत्मा दोनों निरर्थक हो जाती है, जिससे सरीर एवं आत्मा का अस्तित्व ही नहीं होता, अर्थात तीनो चीजे  हमारे शारीर के लिये अति आवश्यक है,
आईए बात करते है नशा के बारे में वास्तव में नशा एक प्रकार का प्राकृतिक द्रब्य है                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                      जो मन एवं सरीर के सम्बन्ध को कुछ समय के लिये रोक देता है जिससे मानव अपना कण्ट्रोल शरीस से खो देता है, ऐसी दशा में मानव पागल की तरह बेवहार करने लगता है, ऐसी दशा कई बार होने पर मन को इसका आनंद आने लगता है, मन सरीर का कमांडर होने के कारण मन बार बार इस ब्यसन की तरफ आकर्षित होता है, जो धीरे धीरे एक गंभीर समस्या का रूप ले लेता है, ये एक प्रकार की आदत सी होती है, जिसके बाद मे चलकर कई प्रकार बीमारिया उत्पन्न होती है, चलिये बताते है कि आज के समय में सबसे अधिक प्रचलित नशा कौन कौन सी है एवं उनसे कौन कौन सी बीमारिया होती या होने कि सम्भावन होती है,

(१) शराब : शराब/ बियर इत्यादि का अधिक सेवन करने सी कई प्रकार कि बीमारिया होती है आलश्य एवं सर दर्द रहना, भुलक्कड़पन एवं मेमोरी लॉस, हार्टअटैक आने के चांसेस का बढ़ाना, तनाव एवं चिंताग्रस्त होना, अधिक बार अल्कोहल का सेवन करने से सरीर का अम्युन सिस्टम ख़राब होने लगते है जिससे डायबिटीज एवं कैंसर जैसी खतरनाक बीमारिया होने कि संभावना बढ़ जाती है। 

(२) बीड़ी / सिगरेट / हेरोइन / चरस / गांजा : इन सभी चीजों को धूम्रपान (Smoking ) करना कहा जाता है, इसका सेवन फेफड़े में ऑक्सीजन कि जगह किया जाता है, फेफङे ऑक्सीजन लेने कि जगह मोनो ऑक्साइड एवं निकोटिन नमक जहर का शोषण करने लगते है, जा हमारे सरीर में जाकर ब्लड सर्कुलशन ल डिस्ट्रभ कर देता है, कोशिकाओं कि सूचना तकनिकी को ख़राब कर देता है, जिससे कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, धूम्रपान से अक्सर फेफड़े के कैंसर होने के चांस ज्यादा होता है, वैसे तो धूम्रपान से कही का भी कैंसर हो सकता है , अतः बीड़ी / सिगरेट / हेरोइन / चरस को तुरंत छोड़ना चाहिए

(३) सुरती / तम्बाखू / गुटखा / जर्दा : ये एक प्रकार का चाउ नशा होता है, जिसका सेवन मुख के लार एवं  स्वाद ग्रंथि द्वारा किया जाता है, चाउ नशा एक प्रकार का निकोटिन एवं तेजाब मिला पदार्थ होता ही , जो हमारे मुख के दन्त, स्वाद  एवं लार ग्रंथि एवं गाला को ख़राब कर देता है, जिसके कारण मनुष्य के दाँत, कान, गाला ख़राब हो जाते है यही नहीं चाउ नशा हमारे पाचन क्रिया को भी ख़राब कर देता है, जिससे गैस्टिक जैसी बीमारी उत्पन हो जाती है, अधिक दिनों तक चाउ नशा का प्रयोग करने से मुख के कैंसर कि भी बीमारी उत्पन्न हो जाती है क्युकी इसके तेजाब से मुख में मसूड़े जीभ  एवं ट्रांसिल कि कोशिकाओं को ख़राब कर देता है जो बाद में चलकर कैंसर सेल के रूप में उत्पन्न हो जाता है।

क्यों लोग नशे के आदि हो जाते है? 
आइए बिचार करते है की नशा ऐसी क्या चीज होती है जिसको लोग चाह कर भी नहीं छोड़ पाते है?
बिचार : आपको पता होगा को मानव सिस्टम ३ चीजों से मिलकर बना ही आत्मा , मन एवं सरीर जिसमे मन सरीर का मैनेजिंग डायरेक्टर होता है, और नशे की लत मन से ही होती है जो एक प्रबल इच्छा शक्ति उत्पन्न करती है, जिसको हमारा सरीर एवं आत्मा नहीं रोक पाती है, वास्तव में हम मन के गुलाम बन जाते है, एवं मन जो चाहता ही हम वही करते है, धीरे-धीरे नशा हमारे आत्मशक्ति को भी कमजोर कर देती ही जिससे हम चाह कर भी नशे से मुक्त नहीं हो पाते है।
नशा लेने के बाद शरीर की सूचना तकनिकी रुक जाती है जिससे हमे पता ही नहीं होता है की हमारे सरीर को या हमारे सरीर में क्या हो रहा है, ऐसी दशा में मन को अति आनंद का अनुभव होता है, जैसे किसी पशु को खुटे की रस्सी छोड़ दिया जाता है और वो फ्री होकर अति खुश हो जाता है और पशु खूब दूर दूर तक दौड़ता है, ऐसे में पशु को आनद का आभास होता है, वैसे ही हमारा मन होता है जो हमारे शरीर की जिम्मेदारिओं से फ्री होकर अधिक आनंद का आभास करता है, ऐसे में हमारा मन धीरे धीरे ऐसी दशा में आने के लिये बेकल हो जाता है, अतः नशे के आदि लोगो को नशा न प्राप्त होने पर मन सरीर में एक प्रकार की उत्तेजना उत्पन्न करता है अर्थात नशा न मिलने से आदमी के सरीर में सरदर्द होना , चक्कर आना , बेचैनी उत्पन्न हो जान इत्यादि सिम्टम उत्पन्न हो जाता है।

नशे की लत से मुक्त होने के उपाय...!





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